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महारानी और टार्ज़न

यह कई हज़ारों साल पहले की बात है. भारत तब एक विशाल संगठित राष्ट्र था और उसकी सीमायें बहुत दूर तक फैली हुईं थी.उन दिनों भारत के ही उत्तर पूर्व भाग में समुद्री तट के कुछ ही दूर एक बेहद विशाल और समृद्ध राज्य था जिसका नाम था स्वर्णपुर.chut chudai kahani hindi me

   यह राज्य अपनी उन्नति, खुशहाली और धन धIन्य के लिए प्रसिद्द था. स्वर्णपुर का नाम भी वास्तव में इस लिए ऐसा पड़ा था क्योंकि यहाँ पर लगभग सब घरों के बाहर सोने की की कारीगरी थी. यहाँ पर लोग काफी मेहनती और खुश हाल थे. यहाँ पर घरों के बाहर सोने के गुम्बद और पूरे राज्य में कई जगहों पर निर्माण के हेतु सजावट में सोने का उपयोग किया गया था.और तो और स्वर्णपुर का राजमहल दुनिया के किसी अजूबे से कम नहीं था. एक दम आलिशान, भव्य , और उसकी एक एक बनावट में अमीरी और धनाढ्यता साफ़ तौर पर दिखती थी.स्वर्णपुर के राजा थे राजा विक्रम प्रताप सिंह. राजा विक्रम प्रताप एक ठीक ठाक राजा थे जिन्हे को यह राज्य अपने पिता से विरासत में मिला था. एक राजा के रूप में वह कोई बुरे नहीं थे लेकिन कोई बहुत अत्यधिक वीर या अतयंत कुशल भी नहीं. बस अपने पिता की विरासत को चल रहे थे. अपने ऐशो आराम और अपने भोग विलास को वह बहुत महत्व देते थे.chut lund ki khani

उनकी पत्नी और महारानी जो की एक चीनी मूल से थीं ,का निधन कुछ साल पूर्व हो चुका था.पर राजमहल की असली शोभा थी - राजकुमारी अजंता   राजकुमारी अजंता अभी केवल १८ साल की ही हुई थी बहुत ही सुन्दर बहुत ही प्यारी और कई गुणों से संपन्न थी अजंता - वह राजा विक्रम प्रताप की इकलौती संतान थी और सिंहासन की वारिस भी.वह अच्छी शिक्षा ले रही थी और    १८ साल की कम उम्र में भी राजकुमारी अजंता ने किताबों के अलावा तलवारबाजी, घुड़सवारी, युद्ध कला में प्रशिक्षण लिया था और वह अपनी कलाओं में वृद्धि कर रही थी. इसके अतिरिक्त वह कई यज्ञों द्वारा कुछ शक्तियां भी हासिल कर चुकी थी.राजकुमारी अजंता १८ साल के उम्र में भी बहुत सुन्दर निकल आयी थी     चाँद सा मासूम चेहरा, भरा हुआ खिलता यौवन जिसको अलंकृत करते थे अजंता के उभरते हुए दोनो उरोज जो अभी भी कम से कम ३२ इंच के हो चुके थे. उसका कद भी औसतन अपनी उम्र की लड़कियों के हिसाब से अधिक था और वह अभी भी ५ फुट ४ इंच से काम न थी|chut chudai khaniya

राजकुमारी अजंता का गदराया ,शरीर उसके खिले हुए गोरे रंग जिसमे मIनो किसी ने केसर मिला दिया हो से और अधिक सुन्दर हो जाता था और उसकी चोली और लहंगे के मध्य उसकी कमर भी अब बल खाने लग गयी थी|राजकुमारी यों दिल की अच्छी और काफी प्रगतिशील विचारधारा की थी परन्तु एक बात थी की उसमे कुछ सीमा तक गुरूर भी था. सर्वगुण होने के साथ साथ राजकुमारी होने का एहसास अजंता में कुछ सीमा तक अहंकार की भावना भी जागृत कर दी थी. इकलौती और इतनी प्यारी बेटी होने के बावजूद राजा विक्रम प्रताप के सम्बन्ध अपनी पुत्री से कोई बहुत अधिक मधुर या प्रेमपूर्ण नहीं थे|वह अपने कार्यों और गतिविधियों में व्यस्त रहते और पुत्री से भेंट कम ही हो पाती थी. पर राजकुमारी अजंता अपने में स्वतंत्र रहने वाली लड़की थी और अपनी होशियारी एवं चातुर्य से उसने अपना विकास किया |राजकुमारी होने के कारण उसे सब सुविधाएँ उपलब्ध थीं. एक यह भी कारण था की राजकुमारी अजंता को कुछ सीमा तक स्वयं को अहंकारी क्यों दिखाना पड़ता था। विभिन प्रकार के लहंगे और चोली पहनना और इनको संगठित करने का भी राजकुमारी अजंता को बेहद शौक था, उन्हें बेशकीमती आभूषण भी बहुत प्रिय थे|chut ki chudai story hindi

इसके अलावा राजकुमारी अजंता को एक अन्य बहुत प्रिय शौक था, जंगल में घूमना, जंगली जानवरो से खेलना और वहां की प्राकृतिक सुंदरता का पूरी तरह आनंद लेना. वह कई बार अवकाश में एक दो दिन ऐसे ही जंगल घूमने जाती थी अपनी चुनिंदा सखियों के साथ और पूरी सैनिक सुरक्षा में रहते हुए. यद्यपि उसके पिता को जंगल और यहाँ तक के आदिवासी भी पसंद नहीं थे परन्तु पुत्री के हठ के आगे उनकी एक न चलती - आवश्यकता पड़ने पर भी राजकुमारी अजंता अपने पिता से झगड़ने से पीछे न हटती थी|स्वर्णपुर के आस पास कुछ जंगल भी थे. यद्यपि उनपर मुख्यत आदिवासी रहते थे फिर भी जंगल की कुछ सम्पदा से भी राज्य को लाभ होता था. परन्तु वहां के आदिवासियों के साथ स्वर्णपुर के बहुत अच्छे सम्बन्ध नहीं थे इस वजह से स्वर्णपुर के सैनिक राज्य के सुरक्षा हेतु हमेशा जंगल की सीमा के पास तैनात रहते थे|choti chut ki chudai ki kahani

   इसके अतिरिक्त स्वर्णपुर के प्रधान मंत्री थे धर्मदेव सिंह जो के अपने कर्त्तव्य के बेहद पक्के और ईमानदार. वरिष्ठ, ज्ञानी और समझदार होने की वजह से वह राज काज के कार्यों में राजा को पूर्ण सहयोग देते और हमेशा सबका सम्मान करते थे तथा सबसे सम्मान पाते भी थे. पर स्वर्णपुर में ही राज दरबार में एक प्रमुख व्यक्ति और भी था जो की वहां का राज्य मंत्री था - शैतान सिंह - यह कोई बहुत अच्छा आदमी नहीं था |और हमेशा विक्रम प्रताप की चाटुकारिता में लगा रहता था- राज्य और प्रजा के हित के लिए काम कम और अपने हित की ज्यादा सोचता था. वह कई मामलों में राजा विक्रम प्रताप को गलत राय देने में भी लगा रहता था| उसी एक पुत्र था सुसीम सिंह जो के पिता की भाँती ही बड़ा बदमाश और आवारा था. पर राज्य मंत्री का पुत्र होने के कारण उसे बहुत से सुविधाएँ थीं जिनका वह दुरपयोग करता था| वह राजकुमारी अजंता से ५ साल बड़ा था. जैसे जैसे राजकुमारी अजंता जवान हो रही थी शैतान सिंह के मन में उसे सुसीम की रानी बनाने और आगे चल कर राजा बनने की इच्छा बलवती हो रही थी.

सुसीम भी राजकुमारी अजंता पर नज़र रखने लगा और कभी कभी उससे छेड़ भी देता पर अजंता या तो उसपर क्रुद्ध हो जाती या फिर उसका जम कर उपहास करती थी  वह जितना राजकुमारी पर नज़र रखता , राजकुमारी उतनी ही घृणा करती थी सुसीम से और सदा या तो उस पर गुस्सा करती या फिर इतना उपहास करती की वह अंदर से जल भून जाता था|  इसके अलावा राज्य के सेनापति थे वीर सिंह जो की बेहद कर्त्तव्य परायण और वीर थे और स्वर्णपुर की विशाल सेना का कुशलता पूर्वक सञ्चालन करते थे. स्वर्णपुर को चलने में प्रधान मंत्री धर्मदेव और सेनापति वीर सिंह का बहुमूल्य योगदान था| स्वर्णपुर का राज परिवार और वहां के लोग जय महाकाल को पूजते थे और वह उनका इष्ट देवता थे.जब भी कभी राज्य में कोई उत्सव होता तो राज दरबार की प्रमुख पुजारी भ्रम देवजी हर पूजा का संयोजन करते थे और सब लोग बड़ी श्रद्धा से जय महाकाल की पूजा करते. स्वर्णपुर का एक पड़ोसी राज्य भी था - रुद्रपुर |जिसका राजा था क्रूर सिंह - अपने नाम के अनुरूप ही बेहद क्रूर , ऐयाश और कमीना इंसान.प्रजा उसे से बेहद नाखुश थी और वह प्रजा में कुत्ते के नाम से प्रसिद्द था. क्रूर सिंह की हर वक़्त यह मंशा रहती की स्वर्णपुर के राज्य को हानि पहुंचे जाये और अपना लाभ हो परन्तु उसकी इतनी शक्ति एवं परिस्थिति नहीं थी की किसी भी प्रकार से वह या उसका राज्य स्वर्णपुर के आगे टिक सके. हाँ परन्तु कुछ भूगोलिक लाभ एवं रुद्रपुर के राजा क्रूर सिंह को मिले वरदान के कारण उसे मारना एवं पराजित करना सरल कार्य नहीं था और उसमे स्वर्णपुर को भी हानि हो सकती थी।choot ki kahani hindi me

स्वर्णपुर और रुद्रपुर की सीमा पर एक गांव पड़ता था माधोपुर. इस गांव का सबस बड़ा दुर्भाग्य यही था की वह दोनों राज्यों की सीमा पर था - इसी कारण यह इन दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण था.इसे राजा विक्रम प्रताप का आलस्य ही कहना चाहिए के एक बड़े राज्य के राजा होकर भी उन्होंने इस विवाद को सुलझाने का यत्न नहीं किया. इस वजह से माधोपुर के लोग भी बहुत दुखी रहते थे क्यंकि दोनों राज्य अपना अपना स्वामित्व और अधिकार इस पर जमाते थे और परिणाम स्वरुप दोनों की सेनाओं में हमेशा तना तनी रहती थी जिसका प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ता था|यह उस दिन की बात है जब राजकुमारी अजंता कुछ दिन अवकाश पर थी सावन का महीना था और मौसम भी खिला हुआ था. महाराज विक्रम प्रताप उन दिनों राज्य के बाहर किसी दौरे पर थे और वह कल शाम को लौट थे राजकुमारी ने कई दिनों से सोच रखा था की वह जंगल के आस पास दौरा करेगी और साथ ही माधोपुर गांव के भी दर्शन करेगी. उसने यह बात अपने पिता के आगे प्रगट नहीं की.रजकुमारी अजंता ने सेनापति से कुछ विचार किया और कुछ चुनिंदा २० सैनकों और अपनी एक दासी के साथ रथ पर सवार होकर जंगल की सीमा पर चलने की तयारी करने लगी. तभी एक गुप्तचर ने आकर सुचना दी के रुद्रपुर के सैनिक आज माधोपुर में कुछ गड़बड़ करने की योजना बना रहे हैं और वाहन के निवासियों को सत्ता रहा हैं|

ये एक संयोग था की राजकुमारी अजंता उस गुप्तचर को जानती थी और महाराज क्योंकि महल में नहीं थे उसने उस गुप्तचर को पूछ लिया नहीं तो वह गुप्तचर महाराज के अलावा सीधा सेनापति से ही बात करता|राजकुमारी अपने अंगरक्षकों के साथ सेनापति के कार्यालय में पहुंची जो की महल एक एक गुप्त कोने में था|राजकुमारी को देखते ही सेनापति वीरसिंह आदर पूर्वक खड़े हो गए - "राजकुमारीजी आप ? आपने मुझे बुला लिया होता..केशों को सुव्यवस्थित रूप सेसुसज्जित कर स्वर्णभूषण धारण किए हुए चेहरे पर कुछ कठोरता लिए हुए सुतवा नासिका ,सुराही दार गर्दन और बेहद सुन्दर राजकुमारी अजंता उनके सम्मुख खड़ी थी|राजकुमारी ने अपने अंगरक्षकों से बाहर रुकने को कहा और वह अंदर चली गयीं|राजकुमारी - "सेनापति जी हमे अभी माधोपुर चलना होगा अपनी विशेष सैनिक टुकड़ी के साथ - और उसने गुप्तचर वाली बात बता दी|"वीरसिंह - "पर राजकुमारी माधोपुर में इस प्रकार की किस्से होने आम बात है और हम लोग जब तक की उनके सैनिक हमारे राज्य में नहीं प्रवेश न करें हमे अपना समय kuwari ladki ki chudai hindi story

राजकुमारी ने उनकी बात बीच में काट दी - "यह नक्शा देखें सेनापति जी - हमे आश्चर्य है की आप यह बात बोल रहे हैं - माधोपुर का अधिकांश भाग हमरे राज्य में ही है|"वीर सिंह - "हाँ राजकुमारी परन्तु महाराज ने कभी इस विषय में    राजकुमारी - "सेनापति जी यह मेरा आदेश है की आप इस समय मेरे साथ माधोपुर चलें - महाराज को उत्तर देने का दायित्व मेरा होगा - आप पर कोई आंच नहीं आएगी |"वीरसिंह - "पर राजकुमारी आप स्वयं क्यों जाएँगी हम खुद सैनिको के साथ  राजकुमारी - "वीर सिंह जी में आपके साथ जाउंगी अर्थात जाउंगी - शीघ्र प्रस्थान करना होगा..उधर माधोपुर में -एक ग्रामीण - "अरे यह रुद्रपुर के सैनिक फिर से आ गए हमे सताने - इनका कर भरते भरते हमारे तो घर ही खली हो जायेंगे|"दूसरा - "अरे आहिस्ता बोल भाई - किसी सैनिक ने सुन लिया तो   और वाकई एक सैनिक ने सुन लिया और उन दोनों को घसीटता हुआ उपसेनापति जलाल सिंह के पास ले गया - रुद्रपुर का उप सेनापति जलाल सिंह आज टुकड़ी के साथ था - अपने राजा की तरह वह भी एक दम धूर्त ऐयाश और कमीना इंसान था |जलाल सिंह - "तुम्हारा सIहस कैसे हुआ हमारे विरोध में कुछ भी कहने का - सैनिको - इन दोनों को दस दस कोड़े लगाए जाएं|"जैसे ही दो सैनिक कोड़े लेकर आगे आये एक तीर कही से तेज़ी आया और उनके आगे आकर धरती में धंस गया गांव वासियों ने देखा और सैनिकों ने भी जब उस दिशा में देखा तो चकित रह गए - माधोपुर गांव की एक लड़की जिसका नाम धर्मI था और उम्र यही कोई १८-१९ साल एक छोटे से धनुष हाथ में लिए थी और उसपर दूसरा तीर चढ़ा रही थी -धर्मा को देखते ही जलाल सिंह चकित रह गया - धर्मI एक गौर वर्ण की सुन्दर और बेहद गदराये शरीर की स्वामिनी थी - उसने लाल और हरे रंग से मिश्रित एक चोली पहनी थी और उसी रंग का एक घाघरा जिसे थोड़ा सा मोड़कर उसने धोती की आकIर में किया था. उसकी लम्बी कमर नंगी थी और उसकी गोल बड़ी सी नाभि भली भाति उसके घाघरे के काम से काम तीन इंच ऊपर दृष्टिगोचर थी- इस समय धर्मा के चेहरे पर गुस्सा था - रुद्रपुर के सैनिको - बहुत अत्याचार सहन कर लिया हमने - अब और नहीं - कह कर उसने दूसरा तीर छोड़ा जिससे की एक सैनिक घायल हो गयाantarvasna choot

पर तभी जलाल सिंह ने कट्टर फेंकी और धर्मा का धनुष टूट कर गिर गया - अब जलाल सिंह अपना घोडा धर्मा के आसपास घूमने लगा - उसे देखते ही उसकी शैतान आँखों में वासना उतरा आयी - उसने अश्लीलता से आँख मारी - "वIह माधोपुर वासियो वIह - यह इतना गदरा माल कहाँ छुपा रखा है - वैसे तो तुम सब लोग गरीबी का रोना रट हो पर यह तो - है कई कातिल जवानी - क्योंकि मेरी जान - आजा मेरे पास और मेरे लंड पे सवार हो जा - तेरी चूत ऐसे गरम करूंगा की उम्र भर मेरा लंड चुसना मांगेगी"धर्मा का गुस्सा चर्म सीमा पर था - "कमीने बदज़ुबान तेरा सIहस कैसे हुआ?ओह्ह - हां हआ "जलाल सिंह ज़ोर से हंसा और उसने तलवार की नोक से धर्मा की चोली का बन्धन खोल दिया - फलस्वरूप उसकी चोली उसके वक्षों पर ढीली पढ़ गयी - धर्मा ने तुरंत अपने दोनों हाथों से अपना सीना धाप लिया और अब उसके चेहरे से बेबसी टपकने लगी - वह याचना के स्वर में चिल्लाई -क्या माधोपुर में कोई पुरुष नहीं है जो स्त्री की लाज बचा सके!"जलाल सिंह और उसके सैनिक ज़ोर से हसे -" तुझे आज सबके सामने रंडी बनाकर छोड़ेंगे और फिर देखेंगे माधोपुर में किसका इतना सiहस है की - और तभी दो तीर सनसनाते हुए आये और जलाल सिंह के दो सैनिको को चीरते हुए निकल गए...जब सबने विपरीत दिशा में देखा तो सब चकित हो गए - स्वर्णपुर की राजकुमारी अजंता के हाथ में धनुष था और यह उसी के निशाने का कमाल था |धर्मा भी चकित हो गयी - सबसे पहले उसने अपनी चोली ठीक कीrani ki chut ki kahani

वह हैरत से उस १८ साल की लड़की जो की राजकुमारी अजंता के अतरिक्त कोई और ना थी और जिसके मासूम और अत्यधिक सुन्दर चेहरे से बहुत ही भोलापन टपकता था , पर इस समाया एक रणचंडी से काम नज़र न आ रही थी |वह दो तीर चला चुकी थी और तीसरा तीर छोड़ने की तैयारी में थी -कुछ देर बाद रुद्रपुर और माधोपुर के सैनिक एक दूसरे के आस पास थे | जैसे ही उसने स्वर्णपुर के सैनिक और राजकुमारी को देखा उसके चेहरे पर हैवानियत दिखने लगी -वीरसिंह आज फिर स्वर्णपुर की सेना हमारे कार्य में विघ्न डालने आ गयी   इस से पहले की वह बात पूरी करता राजकुमारी अजंता अपने पूरे वेग से चिल्लाईं -जलाल सिंह" - वह ज़ोर से चीखी - इतने ज़ोर से की गांव वाले विस्मित हो गए - यहाँ तक की स्वर्णपुर के सैनिक भी - "अच्छा होगा अगर अपनी इस टुकड़ी को यहाँ से ले जाओ और आईन्दा माधोपुर की और मत देखना - वरना जो हश्र होगा तुम्हारा , तुम्हारे राजा भी कांप उठेंगे |"

जलाल सिंह पहले तो चकित होकर राजकुमारी अजंता को देखता रहा - उसके पश्चात उसने राजकुमारी की सर से पांव तक निहारा - राजकुमारी अजंता ने इस समय एक सुनहरी चोली और एक लाल रंग का बेशकीमती लेहेंगा जिसमे सोने और हीरे जेवरात की कढ़ाई हुई थी, पहना था. इसके मध्य में राजकुमारी नंगी कमर थी और बीच में एक गोल प्यारी नाभि - राजकुमारी इतनी सुन्दर थी की कोई भी उसे देखता तो बस - (२0 साल की उम्र में यह हाल है - जलाल सिंह ने मन ही मन सोचा)उसे इस प्रकार न उत्तर देते देख राजकुमारी ने फिर अपनी चेतवानी दोहराई - अब जलाल सिंह बोल पड़ा -राजकुमारी अजंता - स्वर्णपुर एक बड़ा और समृद्ध राज्य है. शायद इस कारण तुम अपना अधिकार दिखने यहाँ आयी हो. वरना महाराज विक्रम प्रताप हमारे कार्यों में अधिक नहीं बोलते - उन्हें ज्ञात है की रुद्रपुर से युद्ध में जीतना संभव नहीं |अब ज़ोर से हंसने की बारी राजकुमारी अजंता और स्वर्णपुर के सैनिको की थी - "दिन में भी स्वपन देख रहे हो जलाल सिंह" - सेनापति वीर सिंह ने कहाchuto ki kahaniyan

जलाल सिंह जिसके मन में राजकुमारी को देखते ही शैतान घर कर गया था अब बोल पड़ा -आपकी राजकुमारी बहुत बोल रही हैं - इनसे कहो जाएँ और जIकर अपनी सखियों के साथ खिलोनो से खेले और बड़ो के कामों में हस्तक्षेप न करें अन्यथा इसका परिणाम   राजकुमारी अजंता क्रुद्ध हो गयीं - "जलाल सिंह – तुम ने राजकुमारी अजंता का उपहास किया है - इसका परिणाम जानते हो?" - अजंता का मासूम और सुन्दर चेहरा गुस्से से लाल हो गया -जलाल सिंह - "हमे आँखे मत दिखाओ राजकुमारी - जलाल सिंह से टकराने का अंजाम तुमने अभी देखा नहीं है|"राजकुमारी अजंता ने धनुष रथ में छोड़ा और म्यान से तलवार निकाल ली - "जलाल सिंह - हो जाये युद्ध - मैं तुम्हे ललकारती हूँ..ह ह ह - जलाल सिंह ज़ोर से हंसा - जाओ जाओ राजकुमारी - तुम मुझसे युद्ध करोगी - खुद लहँगा उठाकर पेशाब करना तो अभी -२ सीखा है - जाओ जाओ - दो पल में ही तुम्हारी कच्छी इन माधोपुर की लोगों के आगे उतार दूंगा - कल की लड़की" -माधोपुर के सैनिक अश्लीलता से हसे और स्वर्णपुर के सैनिकों ने क्रुद्ध होकर तलवारें लहरायीं -kamukta chut

वीर सिंह गुस्से से बोले - "जलाल सिंह तुम्हारा यह दुस्साहस की तुम हमiरी राजकुमारी के बारे में अश्लील शब्द राजकुमारी - "वीर सिंह जी बस - आप चिंता न करें - ज़रा में भी देखूं की इस शैतान की संतान में कितना दम है ?"और राजकुमारी अजंता हाथ में तलवार लहराती हुई रथ से नीचे कूद पड़ीं.-जलाल सिंह आ तुझे बताती हूँ की लहँगा उठाकर कैसे पेशाब किया जाता है - तू आज के बाद अपना नाडा बंद करने की हालत में नहीं होगा.- कमीने घटिया इंसान - मैं आज प्रमाणित कर दूँगी की तू एक नामर्द है देख नहीं रहा - रुद्रपुर के रथ घोड़े चलता हैं पर स्वर्णपुर के रथ शेर चलाया करते हैं - स्वर्णपुर में शेर गलियों में घूमते हैं कम्बख्त.जलाल सिंह के क्रोध की सीमा न थी - वह भी तलवार लेकर घोड़े से कूद पड़ा - स्वर्णपुर के सैनिक जैसे ही अपनी राजकुमारी की रक्षा हेतु आगे आने को हुए , अजंता ने उन्हें इशारे से रोक लिया - "कोई बीच में नहीं आएगा - यह हमारा आदेश है!"और तभी दोनों की तलवारें एक दुसरे से टकराने लगी दोनों में युद्ध होने लगा |तभी जलालसिंह ने एक दांव खेल और तलवार झुका कर राजकुमारी पर नीचे से वार करने की सोची - परन्तु राजकुमारी ने फुर्ती का प्रदर्शन करतेहुए एक छलांग लगाई और जलाल सिंह पर वार करके उसकी पगड़ी उछाल दी. राजकुमारी का लहँगा कुछ ऊपर उठा पर उसने इसके परवाह न की  युद्ध जारी थाchut aur gand ki kahani

तभी लड़ते लड़ते दोनों एक ढलान के पास आ गए और नीचे की और कूद गए - अब आस पास केवल कुछ बड़े बड़े पत्थर थे और ढलान के नीचे होने के कारण उन्हें कोई नहीं देख पा रहा था - बस सनसनाती तलवारों की आवाज़ आ रही थी|अचानक राजकुमारी ने जलालसिंह पर ज़ोर से वार किया - जलालसिंह ने भी प्रतियुत्तर में ज़ोर से तलवार घुमाई और दोनों के हाथ से तलवारें छूट कर दूर जा गिरीं एक पल दोनों ने एक दुसरे को देखा - राजकुमारी जैसे ही तलवार लेने को लपकीं , जलालसिंह ने उसका रास्ता रोक लिया -राजकुमारी अजंता - तुमने मुझे नामरद बनाने की बात की - देख आज में तेरा क्या हश्र करता हूँ -और उसने राजकुमारी को धक्का दिया - राजकुमारी पीठ के बल गिरीं और सँभालने के प्रयास में राजकुमारी की टांगें ऊपर उठ गयीं, जिससे उनका लहँगा काफी हद तक घुटने के ऊपर सरका गया - राजकुमारी की सूंदर, गोरी , मुलायम और स्वस्थ टांगें देख कर जलाल सिंह जैसा शैतान तो बेकाबू हो गया उसके पIयजामे में हलचल होने लगी और उसने अपना लंड थाम लिया - कुत्ते की तरह उसकी जीभ लपलपा गयी -वIह अद्भुत . अपने नाम के अनुरूप अजंता ही हो।"sexy chut story in hindi

और वासना से वशीभूत होकर वह राजकुमारी पर टूट पड़ा और इससे पहले की वह संभालती उसने राजकुमारी के दोनों कोमल गुदगुदे हाथ अपने सख्त और खुरदरे हाथों से दबा दिए और शरीर के आर पार ले आया राजकुमारी के कंठ से हलकी सी चीख निकली.जलाल सिंह - वह बोलीं - छोडो मुझे"जलाल सिंह - "हूँ - बच्ची हो - पर अच्छी हो -"यह कह कर वह राजकुमारी पर झुक और उसे चूमने लग गया - राजकुमारी अपना चेहरा इधर उधर करने लगीं पर कोई लाभ न हुआ उसने अजंता के मुख पर चुंबनों की भीषण वर्षा कर दी और उसका निचला अंग एक विकराल रूप धारण करने लगा|राजकुमारी के शरीर ने हरकत की और वह कुछ घूमीं - जलाल सिंह ने अवसर का लाभ उठाया और राजकुमारी की चोली की डोर खोल दी. अब केवल एक छोटा सा सुनहरी फीता था जो की उनकी चोली को उनके शरीर पैर रोके हुए था|जलाल सिंह ने वह फीता खिसकाया और राजकुमारी की चोली उतार कर फेंक दी| अब अजंता का सीना नंगा हो गया और उसकी उभरती हुई छातियां एक दम बाहर आ गयी. जलाल सिंह उसके गुलाबी स्तनाग्रों से खेलने लगा और उसके उरोज मसल दिए|वह अजंता की ठुण्डी (नाभि) में ज़ोर से उँगलियाँ घूमने लगा जिससे अजंता को दर्द हुआ और वह हलके से चीखी -क्यों राजकुमारी अभी से यह संतरे बन गए हैं आगे चल कर तो बड़े बड़े खरबूजे खाने को मिलेंगे -और उसने राजकुमारी के वक्ष दबाने शुर कर दिए -"हाय अजंता तेरे यह दुधु."chut ki kahani chut

अजंता के गोल उरोज किसी पके हुए संतरे के भाँति पुष्ट थे. अजंता ऊपरी भाग से निर्वस्त्र थी| धीरे धीरे उसका एक हाथ राजकुमारी की कमर पर खिसकने लगा | इस बीच वह अपना पजामा खोल चूका था और उसका तना हुआ लंड बाहर की और निकल गया.मैं इससे तेरी कुंवारी चूत फाड़ दूंगा राजकुमारी - तो कई दिन पेशाब करते हुए रोयेगी|"उसके बाद उसने अपने दोनों हाथ उसकी कमर के इर्द गिर्द डाल कर अपने मुँह से उसकी नाभि को चबाना शुरू कर दिया |चूमते हुए जलाल सिंह के होंठ नीचे के ओर गए और उसने लहंगे के ऊपर पेट और नाभि के बीच के हिस्से को चबाना शुरू कर दिया. राजकुमारी और चीखी. पर जलाल सिंह ने एक बात नहीं गौर की - राजकुमारी अजंता उसका अत्यधिक विरोध नहीं कर रही थी. |वह बेखबर उसे चूमते रहा और अपना एक हाथ राजकुमारी के उठे हुए लहंगे में डाल डाल दिया – जलाल सिंह की उँगलियाँ राजकुमारी अजंता की लाल रंग की कच्छी के ऊपर घूमने लगी...अजंता को अपने जनांग में कुछ हरकत महसूस हुई. - फिर उसने कुछ गौर किया और सहसा उसकी टाँगे तेज़ी से मुड़ी|जलाल सिंह कुछ समझता इस से पहले उसकी सुनहरी चप्पल का वार जलाल सिंह के चेहरे पर ज़ोर से पड़ा राजकुमारी की चप्पलों में जो की सुनहरी थीं , कोने पर कुछ नुकीले कील जैसे हिस्से थे जो जलाल सिंह के चेहरे को छलनी कर गए|राजकुमारी ने फिर से वार किया और वह बिलबिला गया|अजंता फुर्ती से उठी और अपनी तलवार उठाकर जलाल सिंह के गुप्त अंग पर वार किया - आआआआआहहआआह्ह्ह एक खून का फव्वारा छूटा और जलाल सिंह दर्द से चीख उठाchudai chut ki kahani

राजकुमारी अजंता मुस्कुरा उठी - उसने सबसे पहले अपनी चोली उठायी और पहन ली अभी पीठ के पीछे हाथ डालने से वह बहुत कस कर अपनी चोली न पहन सकी पर फिर भी - उसने किसी तरीके उसका पयजामा उसके जलाल सिंह के खून से लथ पथ अंग पर लपेटा और उसे खींचती हुई ऊपर ले आयी -रुद्रपुर के सैनिको - सम्भालो अपने इस उपसेनापति को - मुझे पेशाब करना सीखने चला था - अब यह उम्र भर पेशाब करते हुए मुझे याद करेगा|"जलाल सिंह दर्द से चीख रहा था रुद्रपुर के सैनिक रोष से भर गए और तलवारें तान ली पर तभी राजकुमारी ने आदेश भरे स्वर में कहा -अगर रुद्रपुर के सैनिको ने कोई भी हरकत की तो ध्यान रहे - मेरे सैनिक तैयार हैं."

और राजकुमारी अजंता ने ज़ोरदार आवाज़ में आदेश दिया  आक्रमण"स्वर्णपुर के सैनिक तीर और तलवारों से रुद्रपुर की सेना पर टूट पड़े और कुछ ही पल में रुद्रपुर के सैनिक हथियार डाल कर भागते नज़र आये.| स्वर्णपुर के सैनिकों ने अपने कुछ रथ में लगे शेरो का भी उपयोग किया |फलस्वरूप रुद्रपुर की सेना की टुकड़ी उनके आगे न टिक सकी.| रुद्रपुर के सैनिकों को भागते देख कर माधोपुर के लोगों में प्रसन्नता के भाव नज़र आये और उन्होंने राजकुमारी की जय जयकार की.परन्तु राजकुमारी अजंता ने एक बात गौर की , की माधोपुर के लोगों में वह ख़ुशी और उल्लास नहीं था जिसकी उसने आशा की थी.|सब लोग चकित होकर इस तेरह साल की लड़की जिस पर अभी यौवन खिलना शुरू ही हुआ था और जिसके चेहरे पर बाला की खूबसूरती के साथ एक छोटे बच्चे की सी मासूमियत थी - इस प्रकार एक भीमकाय दिखने वाले शैतान को कैसे पराजित कर दिया| राजकुमारी की कम उम्र के साथ साथ उनका चेहरा इतना भोला था की उनसे इतना अधिक क्रोध और इतनी वीरता एवं युद्ध कौशल की भी अपेक्षा नहीं की जा सकती थी|इसके बाद राजकुमारी अजंता लौट कर अपने रथ पर चढ़ने लगीं तो उनको एक आवाज़ आयी -ठहरिये...राजकुमारी जी!"moti chut kahani

अजंता ने जैसे ही पलट कर देखा , तो पाया की और कोई नहीं धर्मा ही उन्हें आवाज़ दे रही थी.अजंता - "अरे धर्मा तुम. राजकुमारी के मासूम चेहरे पर मुस्कान खिल उठी|"धर्मा - "अच्छा है आपने मुझे पहचान लिया. मैं आजकल यहीं माधोपुर में रह रही हूँ|"अजंता - "मैंने भी ऐसा ही सुना था धर्मा - फिर आस पास के लोगों की और देखते हुए - शायद इस गांव में कोई भी पुरुष नहीं बस्ता - पर तुम एक साहसी लड़की हो |धर्मा - "राजकुमारीजी शायद आप सच कह रही हैं (उसने भी लोगों के झुके हुए सर देख कर कहा) -परन्तु क्या राजमहल ने कभी आज तक माधोपुर जैसे गांव जो की वास्तव में स्वर्णपुर का ही हिस्सा मन जाये , समस्याओं पर ध्यान दिया? और साथ ही उसने राजा विक्रम प्रताप की इस गांव के प्रति उदासीनता का बखान करना शुरू कर दिया|अजंता (कुछ क्रुद्ध स्वर में ) - धर्मा 

 मत भूलो की तुम इस राज्य के महाराज विक्रमप्रताप सिंह जो की हमारे पिता हैं उनके बारे में बोल रही हो. तुम मेरी पुरानी सखी हो इसका तात्पर्य यह नहीं की|धर्मा - "राजकुमारीजी वही तो मैं कह रही हूँ - अगर राजा विक्रम प्रताप हमारे राजा है , तो हमIरी समस्याओं को ध्यान क्यों नहीं दिया जाता - आजा हम रुद्रपुर के सैनिको के अत्याचार का आये दिन शिकार होते हैं . जब कर वसूलने का समय होता है तो आपके अधिकारी यहाँ आते हैं और पूरा कर वसूलते हैं - पर हमारी लूटी हुई फसलों, घर और जान माल की सुरक्षा का कोई नहीं सोचता सिर्फ इस लिए क्योंकि हम स्वर्णपुर की सीमा से कुछ हट कर हैं|राजकुमारी अजंता कुछ प्रभावित हुईं - "ठीक है! धर्मा, हम महाराज से 

इस विषय पर अवश्य चर्चा करेंगे. तुम चिंता न करो ! और हाँ ज़रा कुछ पल के लिए हमारे साथ आओ|और वह धर्मा को रथ के पीछे ले गयी   धर्मा - "क्या बात है राजकुमारी? आप मुझे यहाँ क्यों ले आयीं?अजंता - "धर्मा - २ आवश्यक कार्य हैं . सर्वप्रथम मेरी चोली पीछे से ढीली है इसे कस कर बाँधा दो|और वह अपनी गोरी और चमकदार पीठ धर्मा की और कर के खड़ी हो गयी| धर्मा ने मुस्कुराते हुए चोली राजकुमारी की चोली ठीक कर दी  क्या बात है राजकुमारी जी ? यह चोली   अजंता - "हाँ उस जलाल सिंह से द्विंद्व युद्ध हो गया था - बहुत प्रयत्न करने के बाद सिर्फ हमारी चोली ही उतार सका |धर्मा - तो क्या उसने आपके साथ .अजंता - "उसे मेरे संतरे बहुत पसंद आ गए थे - इसी लिए अपना केला बदले में भेंट करने चला था |धर्मा हंस पड़ी - "आप बहुत ही नटखट हैं राजकुमारी जी - पर अब तो वह बेचारा जलाल सिंह पेशाब करते समय आपको याद करेगा.|अजंता - "और हाँ !यह राजकुमारीजी क्या लगा रखा है. मेरा नाम भी स्मरण नहीं क्या? अरे हाँ मेरा दूसरा कार्य इसी से सम्बंधित है. ज़रा कोई ठीक सी जगह बताओ - अचानक ही बहुत ज़ोर से पेशाब आने लगा गया है.|धर्मा - "वही झाडी के पीछे कोने में. पर अचानक क्यों?अजंता ने चंचलता पूर्वक एक आंख दबाई - "वह जलाल सिंह था न - उसने २-३ बार मेरा लहंगा उठाकर वहीं उँगलियाँ चलाईं. क्या करून अब हालत.?धर्मा फिर हंसी - "कोई बात नहीं !आप कर लीजिये पर जल्दी - आपके सैनिक आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं.|"rasili chut story

अजंता जल्दी से झाड़ियों में जाकर चुप गयी और अपना लहंगा ऊपर उठा लिया. उसके पश्चात उसने अपना लाल रंग का भीतरी वस्त्र (कच्छी) भी अपनी गोरी गुलाबी टांगों से नीचे सरकियी और पेशाब करने लगी. पेशाब करके उसने हल्का महसूस किया और फिर अपने कपडे (लहंगा) इत्यादि ठीक किया और वापस धर्मा के साथ लौट आयी|राजकुमारी अजंता - "सेनापती वीर सिंह जी ज्ञात रहे - धर्मा हमसे जब भी कभी मिलने आना चाहे राजमहल के दरवाज़े इसके लिए खोल दिए जाएं.|सारे माधोपुर निवासी उसे गौर से देखने लगे- आखिर धर्मा ने इस अहंकार से भरी राजकुमारी पर क्या जादू किया (राजकुमारी अजंता अपने अहंकार और बेहद हठी स्वभाव के लिए भी प्रसिद्द थी). तभी राजकुमारी ने सेनापति वीर सिंह को अपने रथ में साथ चलने को कहा -सेनापति वीर सिंह रथ में बैठ गए और अन्य रथों के साथ (जो की सब शेरो के द्वारा चलित थे) सेना की टुकड़ी वापस स्वर्णपुर की और लौट चली.|

रास्ते में राजकुमारी अजंता ने सेनापति को सम्बोधित किया -वीरसिंहजी पिताजी कल शाम को लौट रहे हैं - हम उससे पहले कल जंगल का एक दौरा करना चाहेंगे और वहां पर आदिवासियों से मिलना चाहेंगे. उसके पश्चात हम महाकाल के दर्शन करके वापस महल में लौटेंगे और रात्रि भोजन से पहले पिताजी से भेंट करना चाहेंगे |वीरसिंह - "वह तो ठीक है राजकुमारीजी परन्तु क्या आपकी सुरक्षा की दृष्टि से यह उचित होगा की आप आदिवासियों से मिलने स्वयं जाएं?अजंता - "आप और सेना की टुकड़ी हमारे साथ जायेंगे. परन्तु ध्यान रहे हमारी इस बात को गुप्त रखा जाये.और जंगल के आस पास के सुरक्षा अधिक कर दी जाये.|वीरसिंह ने स्वीकृति में सर हिला दिया - "आपके आदेश का पालन होगा राजकुमारीजी.!!इतने में महल आ गया और राजकुमारी और वीरसिंह एक दुसरे का अभिवादन करके अपने - अपने कक्ष में चले गए.|राजकुमारी का अभिवादन करने उनकी तीन दासियाँ तुरंत पहुँच गयीं. | अभी राजकुमारी महल के गलियारे से गुज़र ही रही थीं की उन्हें कही कुछ गिरने की अवाज़ा आयी - "देखा तो एक सोने का बरतन कहीं ज़मीन पर गिर गया था" - जब राजकुमारी ने नज़र उठाकर देखा तो उसका मन घृणा से भर उठा -महामाया देवी तुम? क्या यह आवश्यक है की तुम मुझे अपना यह मनहूस चेहरा रोज़ दिखाओ? तुम्हे ज्ञात है की में तुमसे कितनी _ chachi ki chut stories

महामाया - "घृणा करती हो (महामाया एक गोरे रंग की प्रौढ़ एवं कुछ हद तक थुलथुल शरीर की स्वामिनी थी. उस अधेड़ औरत की आँखों में एक अजीब वहशत और किसी को भी भयभीत कर देने वाले भाव थे. उसके चेहरे पर मासूमियत तो नाम मात्र की भी न थाई बल्कि वह दिखने में ही कोई बेहद कपटी और तेज़ तरार औरत प्रतीत होती थी वह किसी समय कुछ सुन्दर भी रही होगी, परन्तु अब उम्र ने उसके चेहरे पर बुढ़ापा दिखाना शुरू कर दिया था) - क्या बात है अजंता तुम  अजंता घृणा और क्रोध से भर उठी - राजकुमारी अजंता  कहो अशिष्ट नारी. तुम्हारा साहस कैसा हुए मुझे इस प्रकार पुकारने का. दूर हो जाओ मेरी निगाहों से और मत आया करो मेरे सामने.|महामाया देवी पैर पटकती हुई गुस्से में अपने कक्ष में घुस गयी - देख लूंगी तुम्हे राजकुमारी अजंता - तुम्हारा यह अहंकार एक दिन मैंने न तोडा तो _अपने चरणों में तुम्हे झुका के रहूंगी.|जैसे ही राजकुमारी अपने कक्ष में पहुंची उनकी दासियों ने कहा - "आप शांत हो जाएं राजकुमारीजी - कृपया क्रोध कर अपने मन को ख़राब न करें-राजकुमारी हलके से मुस्कुरायी - "हाँ तुम लोग ठीक कह रही हो!एक दासी - "आप के स्नान का प्रबंध करें?राजकुमारी - "नहीं आज में अपने निजी स्नानघर में नहाउंगी"chut kahani audio

और कक्ष में घुसते ही राजकुमारी अजंता ने खुद को एक प्रकार बिस्तर पर पीठ के बल फेंक ही दिया.राजकुमारी विचारों में खो गयी और आज के घटनाक्रम के बारे में सोचने लगी - उनकी निगाहें अपने विशाल और खूब भली भाँती सुस्सजित शायना कक्ष की छत पर तिकी थीं |फिर थोड़ी देर के पश्चात् वह उठीं और अपने कमरे में लगे एक बहुत बड़े (लगभग आदम कद)आईने के आगे आ कर खड़ी हो गयीं |उसने ने अपना सुनहरी रंग का दुपट्टा खिसका कर एक और रख दिया और उनके हाथ अपनी पीठ की ओर घूम गए.उसने अपनी चोली की गांठ खोल दी और दुसरे हाथ से उसे उतार कर एक ओर रख दिया| राजकुमारी अजंता के संतरे की तरह एक दम गोल वक्ष उभरे हुए बाहर निकल आये ओर आईने में दृष्टिगोचर हो गए |उसके उगते हुए उरोज उसके खिलते यौवन का बहुत ही सुन्दर प्रतिक थे - अपनी उम्र की लड़कियों की अपेक्षा राजकुमारी का वक्षस्थल अधिक उन्नत था |कुछ सोच कर उनके चेहरे पर एक हलकी सी चंचल मुस्कराहट आ गयी -बेचारा जलाल सिंह"राजकुमारी अब बिलकुल एक ऐसी आयु में थी जिसके बाद उसका यौवन और खिलना था - इस परिवर्तन के समय पर ही आज किसी पुरुष ने उसका शरीर छुआ था भले ही वह जलाल सिंह जैसा कोई नीच इंसान ही क्यों न हो |chachi ki chut stories

पर राजकुमारी को यह सोच कर उत्तेजना हो रही थी की कल उसके सपनो का राजकुमार जब उसे प्यार से उसका बदन छुएगा तो कैसा एहसास होगा - वह कोई बहुत वीर और साहसी और शायद संसार का सबसे अधिक सुन्दर और सुदर्शन , पराक्रमी पुरुष होगा - अपने नंगे वक्ष स्थल को निहारती हुईं वह धीरे से बुदबुदा उठी -और कोई ऐसा जो मुझे परास्त कर सके...पर तभी जैसे राजकुमारी को एक बहुत बड़ा झटका लगा - अचानक ही उनके बिस्तर के पीछे से ज़ोर से निर्लज्जता पूर्वक हँसता हुआ स्वर सुनाई दिया-राजकुमारी – "तुमममममम...!वह वाह राजकुमारी वाह - अद्भुत सौंदर्य ?सुसीम बेहद निर्लज्ज होकर वहां खड़ा तालियां बजाने लगा - और जैसे ही उसकी दृष्टि राजकुमारी के नंगे उरोजों पर पड़ी उसकी आँखे फ़ैल गयीं और एक हाथ से वह अपना निचला अंग धोती में टटोलने लगा जो की राजकुमारी को इस अवस्था में देख कर कड़क हो गया था.|राजकुमारी ने तुरंत अपना नंगा सीना अपने दोनों हाथों से ढांप लिया और ज़ोर से चिल्लाई -chut chat kahani

सुसीम तुम्हारा साहस कैसे हुआ हमारे कक्ष में इस प्रकार अंदर आने का - और किसने इस बात की अनुमति दी  सुसीम - "राजकुमारी तुम अच्छी तरह से जानती हो की सुसीम को जहाँ जाना हो वह वहां पहुँच जाता है - और हाँ रही बात अनुमति की तो समझ लीजिये राजकुमारी अजंता की सुसीम का कराया अनुमति माँगना नहीं अपितु आदेश देना है - और हाँ आपको इस रूप में देख कर मेरी दीवानगी आपके लिए कई गुना बढ़ गयी है - क्या अन्तर पड़ता है? - भविष्य में हमारा विवाह तो होना ही है - तो क्यों न हम आज ही  और उसके हाथ राजकुमारी को थामने के लिए आगे बढे.और तभी सुसीम ज़ोरों से कराह उठा और अपना मुख पकड़ कर कक्ष के फर्श पर बैठ गया.| राजकुमारी अजंता ने पता नहीं कहाँ से एक कट्टार निकली और सुसीम की नाक के पास सीधा चेहरे पर वार किया - उसके चेहरे से रक्त बह निकला और सुसीम की चीखें निकल गयीं -आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ोुउउउउउउ

राजकुमारी ने अपनी चोली धारण की और उसे अपने वक्ष पर ठीक से समतल किया - उसके बाद दुपट्टा कंधे पर लेकर सुसीम को आदेश भरे स्वर में बोली -तुम पिछले दरवाज़े से स्वयं जाते हो या बुलाऊँ सैनिको को."वह कहती रहीं - अच्छा हो सुसीम यह उद्दंडता दोबारा न हो - अन्यथा तुम एक बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाओगे|आज के बात हमारे निकट आने का अर्थ होगा अपनी मृत्यु को दावत देना.राजकुमारी ने कट्टार पून: थाम लिया और एक रणचंडी की भाँती नज़र आ रही थीं - "यहाँ से चुप चाप जाओगे और बाहर इस चोट का कारण कुछ और बताओगे तो तुम्हारा ही भला है - अन्यथा राजकुमारी के कक्ष में बिना अनुमति प्रवह करने औरउनसे दुर्व्यहवार करने का दंड क्या होगा तुम भली भाँती परिचित हो."choot aur lund ki kahani

सुसीम लहूलुहान और पीड़ित तो था ही साथ में वह १८ साल की इस बालिका का यह प्रचंड रूप देख कर अत्यंत चकित भी हो गया - १८ साल के सुसीम ने सोचा की वह इस छोटी सी लड़की पर आराम से नियंत्रण पा लेगा परन्तु उसकी सब आशाओं पर पानी फिर गया - वह अपने लहू लुहान चेहरे को लेकर बाहर चला गया और सबको चोट लगने को कोई अन्य कहानी बता दी. राजकुमारी आज की घटनाओ से प्रसन्न कम और क्षुब्ध अधिक थीं.| उन्हें कई दिनों से कुछ ऐसा प्रतीत होने लग गया था मIनो उनके और महाराज के इर्द गिर्द इस राजमहल में कुछ बहुत अनुचित और संदिग्ध हो रहा है जो की उनके लिए आगे चल कर संकटमय हो सकता है . राजकुमारी ने अपने कल के जंगल दौरे के बाद होने पिता से रात को बात करने का निश्चय कियाchut story hindi me

उसके बाद राजकुमारी अपने निजी स्नानागार में आ गयीं और सब कपडे उतार दिए ।उन्होंने अच्छी तरह से स्नान किया| और रात्रि भोजन लेकर अपने शयन कक्ष में आ गयी. कुछ देर के पश्चात वह गहरी निद्रा में थीं| लेकिन उस से पहले उन्होंने अपने अंगरक्षकों और दासियों को यह आदेश दे दिया की कोई भी आज के बाद बिना उनके आदेश के उनके कमरे में प्रवेश नहीं करेगा.

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