Desi Bur Land Kahani

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कुनबे में रोज़ सामूहिक चुदाई 

अरे यार पहले मेरी सुनो। तुम सब लोग तो जानती ही हो की मेरा नाम  रजिया  है।मैं मस्त जवान हो चुकी हूँ। मेरी 

उम्र 19 साल की है और मैं वह सब जानती हूँ जो एक जवान लड़की को जानना चाहिए। मुझे तो मेरे कुनबे वालों ने 

ही लण्ड पकड़ाना  शुरू कर दिया है।कल मुझे मेरे खालू के छोटे भाई जान ने अँधेरे में मेरा हाथ  पकड़ कर अपने 

लण्ड पर रखा और बोला रजिया इसे ज़रा प्यार से पकड़ के देखो और बताओ की तुम्हे ये पसंद है की नहीं ? मुझे भी 

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जोश गया तो मैंने लण्ड मुठ्ठी में ले  लिया और कहा हाय दईया ये तो बड़ा मोटा लग रहा है। वह बोला इसे मुंह में 

लेकर चूसो न प्लीज। मैं बोली यार यहाँ अन्धेरा है! मुझे इसकी शकल भी नहीं दिखाई पड़ रही है तो कैसे चूसूं ? फिर 

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वह मुझे थोड़ा उजाले में ले गया तब मैंने लण्ड मुंह  में लिया और खूब मस्ती से चूसा और चाटा। मुझे भी मज़ा आया 

और उसे भी। इसके पहले मुझे फूफी का बेटा अपना लण्ड पकड़ा चुका था। मैं उसका भी लण्ड बड़े प्यार से चूसा 

था। दोनों के लण्ड बड़े मस्त हैं यार। मुझे लण्ड पकड़ना, लण्ड चूसना, लण्ड का सड़का मारना सब आ गया और 

अब तो मैं सड़का मार मार कर लण्ड मजे से पीने भी लगी हूँ। नाजिया बोली   लण्ड तो मैं भी पीती हूँ अपने कुनबे के 

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लोगों के। मेरी अम्मी ने कहा था की नाजिया अब तू जवान हो गयी है अब तुझे कुनबे के लोग ही अपना  लण्ड 

पकड़ायेंगें और तेरी बुर भी चोदेंगें। कुनबे के मर्द भी भोसड़ी वाले सबकी बुर में लण्ड पेलते हैं और खूब खुल्लम 

खुल्ला चोदते हैं। कल मैंने भी अपने खालू को मेरी माँ का भोसड़ा चोदते हुए देखा था। आज सवेरे सवेरे ही मैंने 

अपनी अम्मी जान को फूफी के बेटे का लण्ड चाटते हुए देखा है। इसका मतलब यह है की कुनबे की औरतें भी 

सबसे खूब बिंदास चुदवातीं हैं।रेशमा बोली  हां यह बात तो बिलकुल सच है। कल मेरी अम्मी जब अपने देवर यानी 

मेरे छोटे चचा जान से चुदवा रहीं थीं तो चचा बोला भाभी अब तो तेरी बेटी   रेशमा पूरी तरह जवान हो गयी है। उसे 

भी पकड़ा दो मेरा लण्ड। मैं तेरी ही तरह उसकी भी बुर लेना चाहता हूँ। अम्मी ने कहा हां हां दिलवा दूँगी मैं तुझे 

रेशमा की बुर। अब तो वह बुर चोदी चुदवाने वाली हो गयी है। मैं अपने हाथ से ही  तेरा लण्ड उसकी चूत में घुसा 

दूँगी पर पहले उसकी माँ का भोसड़ा तो ठीक से चोदो। पूरा लण्ड पेल पेल के चोदो। मर्दों की तरह हचक हचक के 

चोदो। मैं यह सब देख सुन कर खुद गरमा गयी। हुमा बोली  हां यार कुबने में बहुत कुछ होता है और चुदाई भी 

एकदम खुल कर होती है। किसी को कोई शर्म नहीं लिहाज़ नहीं और कोई झिझक भी नहीं चाहे वह कोई मर्द हो या 

औरत ?अगले दिन फिर हम चारों मैं,रजिया, नाजिया, रेशमा और हुमा, मिलीं और अपने अपने किस्से सुनाने लगीं। 

मैंने कहा - यार आज रात को क्या हुआ मैं आप तुमको सुना रही हूँ :-मैं जब से जवान हुई हूँ तबसे बड़े लोगों के साथ 

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सोने लगी हूँ। कल रात को मैं थोड़ा जल्दी सो गयी। रात को करीब 12 बजे उठी तो देखा की मेरा चचा जान मेरी 

खाला का भोसड़ा चोद रहा है, खालू चचा जान की बेटी की बुर चोद रहा है, फूफी अपने देवर से चुदवा रही है। 

उसका बेटा मेरी माँ का भोसड़ा चोदने में लगा है, मेरा भाई जान तो अपनी साली की बुर धकापेल चोद रहा है। 

फूफी की बेटी अपने ही अब्बू का लण्ड चाट रही है, आसिफ और आसिक दोनों लड़के एक दूसरे की माँ चोद रहें 

हैं,  मेरा अब्बू मेरी भाभी जान की बुर बड़े मजे से ले रहा है और भाभी जान का भाई जान मेरी बड़ी बहन की बुर 

चोदने में जुटा है। मुझे कोई भी कपडे पहने नज़र नहीं आया।सब के सब नंगे ही थे औरतें भी सब नंगी और मरद भी 

सब नंगे। ये सब देख कर मुझे अपने कपड़े अच्छे नहीं लगे और मैं भी उन्हें उतारने लगी। मेरी चूत की आग तो पहले 

से ही धधक रही थी। मैं जैसे ही अपनी चूँचियाँ खोली वैसे ही किसी ने अपना लण्ड मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने 

कनखियों से देखा तो वह मेरा खाला का बड़ा बेटा था। उसका लण्ड देख कर मैं मस्त हो गयी। लण्ड का सुपाड़ा ही 

बहन चोद 3" का था। मेरे मुंह से निकला भोसड़ी के नदीम तू बहुत देर के बाद आया। अपनी माँ चोद के आया है 

क्या तू मादर चोद ? वह बोला नहीं यार मैं अपनी माँ की देवरानी का मस्त चिकना चमचमाता हुआ भोसड़ा चोद कर 

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आया हूँ। मैंने सलवार खोली और नंगी नंगी उसका लौड़ा चाटने लगी पेल्हड़ सहलाने लगी और लण्ड के टोपा चूमने 

लगी। पूरा घर चुदाई में व्यस्त था। 10 लण्ड और 10 चूत का समागम हो रहा था। मैंने पहली बार ऐसा सीन देख रही 

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थी। पूरा आँगन चुदाई से भरा हुआ था। ऐसा लग रहा था की आँगन चुदाई के लिए ही बनाया गया है। कुछ देर के 

बाद नदीम ने भी अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और चोदने लगी। मैं भी बड़ी बेशर्मी से बिंदास अपनी गांड उठा 

उठा के चुदवाने लगी। हम सब औरतें चुदवा भी रहीं थीं और सबकी चुदाई देख भी रहीं थीं। इतने में चचा जान ने 

खाला की बुर से लौड़ा निकाल कर अपनी ही बेटी की बुर में घुसा दिया। खालू जो उसकी बेटी चोद रहा था अब अब 

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वह फूफी का भोसड़ा चोदने लगा, फूफी के देवर ने लण्ड मेरी माँ की चूत में पेल दिया और फूफी का बेटा जो मेरी 

माँ चोद रहा था अब खाला का भोसड़ा चोदने लगा। हमारे यहाँ सामूहिक चुदाई में सब लोग एक बुर से लण्ड 

निकाल कर दूसरी बुर में पेल देतें हैं। इससे सबको खूब मज़ा आता है। भाई जाना ने अपनी साली की बुर से लण्ड 

निकाला और फूफी की बेटी की बुर में घुसा दिया, फूफा ने अपना लण्ड भाई जान की साली की बुर में पेल दिया। 

आसिफ और असिक जो एक दूसरे की माँ चोद रहे थे अब एक दूसरे की बीवी चोदने लगे। उधर मेरा अब्बू जो 

अपनी बहू की बुर ले रहा था अब अपनी बेटी यानी मेरी बड़ी बहन की बुर लेने लगा। भाभी जान के भाई ने लण्ड 

मेरी चूत में पेल दिया और नादिर ने लण्ड मेरी भाभी की चूत में घुसेड़ दिया। यहाँ भी सबने एक बुर से लण्ड निकाल 

कर दूसरी बुर में घुसा दिया तो सबका मज़ा दूना हो गया। मेरी नज़र सबके लण्ड पर थी। मैं सबके लण्ड लपक 

लपक कर पकड़ना चाहती थी और सबसे धमक धमक कर चुदवाना चाहती थी। मुझे नंगे और खड़े लण्ड देखने का 

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और पकड़ने का बड़ा शौक है। मैंने ठान लिया की आज मैं सबके लण्ड अपनी चूत में पेलूँगी जरूर चाहे सवेरा क्यों 

न हो जाए ? तब तक नाजिया बोल पड़ी - यार अब मेरी कहानी सुनो। वह सुनाने लगी :-मेरे भी घर में हर रोज़ रात 

को होती है सामूहिक चुदाई और अब तो मैं भी उसमें शामिल होने लगी हूँ क्योंकि मैं अब 20 साल की हूँ। दो साल 

पहले मैं एक दिन छत पर कपड़े फैलाने गई तो देखा की मेरे किरायेदार का लड़का बैठे हुए सड़का मार रहा है। 

मतलब यह की वह मुठ्ठ मार रहा था. उसका लण्ड देख कर मैं ललचा गयी। मैंने ऊपर दरवाजा बंद किया उसके 

पास गयी और बोली तू भोसड़ी का अपने हाथ से अपना सड़का मार रह है। मैं हूँ न ? मैं मारूंगी तेरे लण्ड का 

सड़का। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया, वह खड़ा था। मैं खुद घुटनो के बल बैठ गई और एक हाथ से पेल्हड़ थाम 

कर लण्ड ऊपर नीचे करने लगी। मुझे ऐसा करने में मज़ा आने लगा। वह सिसियाने लगा तो मैं और जोश में आ 

गई। आखिर कार मैंने उसका वीर्य निकाल ही लिया। तब तक मुझे नहीं मालूम था की वीर्य पिया जाता है। मगर मुझे 

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लण्ड पकड़ कर सड़का मारना अच्छा लगा। दूसरे ही दिन मेरे मामू जान ने मुझे अपना लण्ड पकड़ा दिया। मेरे मुंह 

से निकला क्या सड़का मरवाओगे मामू जान ? वह बोला हां मार दो सड़का। मैंने उसका भी सड़का मारा। एक दिन 

मेरी खाला ने कहा अरी बुर चोदी नाजिया अब तू जवान हो गयी है। माँ का भोसड़ा चुदाने वाली हो गई है तू ? लण्ड 

पीने वाली और अपनी चूत बजवाने वाली हो गई है तू ? अब आज रात से ही हम सबके साथ सोया कर। मैं उसकी 

बात मान गयी और रात को सबके साथ ही बिस्तर पर लेट गयी। थोड़ी ही देर में भीड़ बढ़ने लगी। इतने में मैं बाथ 

रूम चली गयी। वहां से लौट कर आयी तो देखा की मेरा खालू मेरी फूफी की बेटी चोद रहा है और फूफा खाला की 

बेटी चोद रहा है। मैंने सुना था की कुनबे में लोग एक दूसरे की बीवियां तो चोदते ही हैं लेकिन बीवियों से ज्यादा एक 

दूसरे की बेटियां चोदते हैं। आज अपनी आँखों से देख रही हूँ। उधर खाला का बेटा मेरी माँ का भोसड़ा चोदने लगा 

था. मामू जान मेरी फूफी का भोसड़ा भकाभक चोद रहा था। मामू की बेटी नंगी नंगी अपने चाचू का लण्ड चाट रही 

थी और चाचू की बेटी अपने देवर से चुदवा रही थी। मेरी भाभी जान अब्बू का लण्ड पी रही थी । मैंने अब्बू का लण्ड 

पहली बार देखा तो बड़ी देर तक देखते रही।इतने में भाभी जान का भाई एकदम नंगा नंगा मेरे सामने खड़ा हो 

गया। उसका लण्ड मेरे होंठों तक आ चुका था तो मेरा मुंह अपने आप ही खुल गया। मैं भी बड़ी बेशर्मी से लण्ड मुंह 

में लेकर चूसने लगी और अपने कपड़े भी उतार कर फेंक दिया।मुझे नंगी देख कर उसका लौड़ा और फूल गया। 

फिर उसने मुझे खूब अच्छी तरह सबके सामने चोदा। मैं चूँकि नई थी इस महफ़िल में तो मुझे सब लोग चुदवाते हुए 

बड़े गौर से देख रहे थे। फिर दूसरी बार से मैंने एक एक करके सबके लण्ड का मज़ा लिया। अंत में मैंने अपने अब्बू 

का भी लौड़ा पकड़ा।मैंने देखा की कुनबे की सभी लड़कियां अपने अपने अब्बू के लण्ड पे बैठतीं हैं और चुदवातीं हैं 

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तो मैं क्यों न चुदवाऊँ ? मैंने भी बड़े मन से अब्बू से चुदवाया। फिर खाला जान ने कहा भी बेटी नाजिया देखो हमारे 

समाज में कोई भी किसी की भी बुर चोद सकता है और कोई भीकिसी का भी लण्ड अपनी चूत में पेलवा सकती है।

ये सब जायज़ है इसमें कोई गुनाहनहीं है। फिर क्या मेरी हिम्मत बढ़ गयी।रेशमा बोली - अब मेरी भी सुनो यार। मेरे 

भी कुनबे में हर रोज़ सामूहिक चुदाई होती है। मुझे तो मेरी अम्मी जान ने ही लण्ड पकड़ा दिया था जब मैं 18 + की 

हुई थी। मैं कॉलेज से आयी थी तो अम्मी ने कहा रेशमा कपड़े बदल कर जल्दी से मेरे कमरे में आओ। मैं जब कमरे 

में घुसी तो देखा की अम्मी एक अंकल का लण्ड नंगी नंगी बड़ी बेशर्मी से पी रही हैं। लण्ड जब पूरा मुंह के बाहर 

आया तो उसे देख कर मेरी गांड फट गई।मेरे मुँह से निकला - हाय रे इतना बड़ा लण्ड भोसड़ी का ? लण्ड क्या 

इतना बड़ा होता है अम्मी जान ?अम्मी बोली - अरे इसे पकड़ कर तो देख बुर चोदी रेशमा ? लण्ड तो इससे भी बड़े 

बड़े होतें हैं। बस अम्मी ने प्यार से पकड़ा दिया मुझे लण्ड और मैं उसे पकड़ कर चूमने चाटने लगी और पेल्हड़ भी 

सहलाने लगी।अम्मी बोली बेटी अब ये लण्ड तू अपनी माँ के भोसड़ा में पेल दे। आज से अपनी माँ चुदाना शुरू कर 

दे। तेरी खाला की बेटी एक साल से अपनी माँ चुदा रही है।यह सुन कर मैंने वाक़ई लण्ड घुसा दिया माँ के भोसड़ा 

में। मैं चुदवाने लगी माँ का भोसड़ा और फिर अम्मी ने भी बड़े आहिस्ते से लण्ड मेरी चूत में पेला और मैं भी अंकल 

से धीरे धीरे चुदाने लगी। मुझे भी चुदवाने में मज़ा आने लगा।अम्मी को पता नहीं था की मैं दो लड़कों से चुदी हुई हूँ।

रात को घर का सीन कुछ और ही था। मैं बिस्तर पर थोड़ा लेट पहुंची। काम चालू हो गया था। मेरा बड़ा भाई जान 

मामू जान की बीवी चोद रहा था और मामू जान भाई जान की बीवी चोद रहा था। मेरा चचा फूफी का भोसड़ा चोद 

रहा और फूफा चचा जान की बीवीचोद रहा था। चचा की बेटी खाला के बेटे से चुदवा रही थी और खाला की बेटी 

चचा के बेटे से चुदवा रही थी।अम्मी जान अपने बहनोई का लण्ड पकड़ कर बड़ी मस्ती से चूस रहीं थीं और उसका 

नंदोई अपनी ही बेटी की बुर ले रहा था। मेरा अब्बू अपनी बहू की बुर चोदने में जुटा हुआ था।मैं खड़ी ही थी की पीछे 

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से किसी ने मेरी कमर में हाथ डाल कर कहा हाय मेरी जान रेशमा तू मेरा लण्ड चूस ले ?वो कोई और नहीं मेरे मामू 

जान का बड़ा बेटा था। मैं गरम तो थी ही तो बोली कहाँ है तेरा भोसड़ी का लण्ड ? दिखाओ न मुझे ?तब वह नंगा 

नंगा मेरे आगे खड़ा हो गया तो मैं लण्ड पकड़ कर बोली बाप रे बाप इतना बड़ा लण्ड ? मैं लण्ड सच में चूसने लगी। 

फिर मैं भी उससे चुदवाने लगी। हमारे कुनबे में सब मिलकर एक ही साथ चुदाई करतें हैं, चाहे माँ बेटी हो बाप बेटा 

हो, सास बहू हो, नन्द भौजाई हो, देवरानी जेठानी हो, ऐसे में बड़ा मज़ा आता है। फिर मैंने भी सबके लण्ड का स्वाद 

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लिया और खूब झमाझम सबसे चुदवाया।फिर सबने हुमा की तरफ देखा की अब वह भी अपनी कहानी अपनी 

जुबानी सुनायेगी।इससे पहले की वह बोलती पीछे से उसकी अम्मी जान आ गई और बोली -हुमा बुर चोदी क्या 

सुनायेगी अपनी कहानी ? मैं सुनाऊँगी इस भोसड़ी वाली की कहानी। हुमा की माँ का भोंसड़ा ? हुमा की बहन की 

बुर ? आजकल यह अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड खूब पेल रही है!और इसकी माँ भी इसकी बुर में लण्ड खूब पेल 

रही है। अपनी माँ से भी ज्यादा चुदक्कड़ है, माँ की लौड़ी हुमा । बड़े बड़े देशी विदेशी लण्ड सब खाती है इसकी बुर 

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? इसकी बहन चोद मस्तानी बुर जैसी बुर हमारे कुनबे में किसी की नहीं है।मैंने अपनी आँखों से देखा है की गपर 

गपर एक के बाद एक लण्ड खुले आम खाती रहती है इसकी बुर। अब मन लगा कर सुनो तुम लोग :-हुमा जब 17 

साल की हुई तो इसका बदन भर चुका था। जवानी इसके जिस्म पर पूरी तरह सवार हो चुकी थी। मैं समझ गयी की 

अब इसे लण्ड की सख्त जरुरत है। बिना लंडके हुमा अब एक दिन भी नहीं रह पायेगी। बस मैंने इसे लण्ड पकड़ाने 

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का प्लान बना लिया।उस दिन जब हुमा घर आयी तो मैंने कहा बेटी ज़रा झांटें बनाने वाली मशीन लेकर मेरे पास 

आना। वह जब कमरे में दाखिल हुआ तो बिलकुल नंगी नंगी अपना भोसड़ा खोले हुए अपनी बड़ी बड़ी चूँचियाँ खोले 

हुए सोफा पर बैठी हूँ।मेरे दाहिनी तरफ एक आदमी नंगा बैठा है और बायीं तरफ भी एक आदमी नंगा बैठा है। वो 

दोनों मेरी एक एक चूँची चूम रहे हैं और मैं उन दोनों के लण्ड अपने दोनों हाथों से पकड़ बार बार ऊपर नीचे कर 

रही हूँ। वह अंदर आकर थोड़ा झिझकी तो मैंने कहा अरे हुमा बेटी झिझकने की जरुरत नहीं है। तुझे अब लण्ड की 

जरुरत है। इधर आ और सफी की झांटें छील दे। कर दे इसका लण्ड एकदम चिकना। फिर रफ़ी की भी झांटें साफ़ 

कर दे।उसने कहा माना और दोनों लण्ड चिकने कर दिए। तब मैंने कहा बेटी अब तू अपने कपड़े कर लण्ड पकड़ 

ले। घर में लण्ड हमेशा नंगी होकर ही पकड़ा जाता है। उसने झट्ट से रफ़ी का लण्ड पकड़ लिया। सफी उसकी बुर 

चाटने लगा। मैंने सफी का  लण्ड मुंह में लिया तो रफ़ी मेरी बुर चाटने लगा। मैंने पोंछा कैसा लग रहा है तूझे बेटी 

हुमा। वह बोली बड़ा मज़ा आ रहा है अम्मी जान। मैं मादर चोद सच   में लण्ड के लिए बहुत दिनों से तरस रही थी। 

मैंने कहा तो पेल दे लण्ड अपनी माँ के भोसड़ा में. उसने रफ़ी का लण्ड मेरी बुर में पेला तो मैंने सफी का लण्ड 

उसकी बुर में। वह अपनी माँ का भोसड़ा चुदाने लगी और मैं अपनी बिटिया की बुर चुदाने लगी।मैंने कहा बेटी शर्म 

मत करना ऐसा तो यहाँ सबके घर में होता है। फिर मैंने पूंछा बेटी इसके पहले तूने कभी कुछ किया है ? वह बोली 

हां किया है अम्मी जान। अपनी दो सहेलियों की माँ चोदती हूँ मैं। उनके भाईयों के लण्ड पे बैठतीं हूँ मैं। एक सहेली 

के अब्बू का लण्ड पीती हूँ मैं। अगर मैं कल गयी उसके घर तो वह अपना लण्ड मेरी बुर में पेल देगा।मैंने कहा हाय 

दईया तो ये सारे लण्ड भी मेरे भोसड़ा में पेलो न बेटी हुमा। वह बोली हां पेलूँगी। अब आज मुझे मालूम हुआ की तेरा 

भोसड़ा बहन चोद कितना गरम है और कितनी मस्ती से लण्ड खाता है ? मैंने कहा - बुर चोदी हुमा, तेरी माँ का 

भोसड़ा ? तेरी बहन की बुर ? तेरी माँ की बिटिया की चूत ? अब मुझे मालूम हो गया की तेरी जवानी का राज़ क्या है 

? तेरी चूँचियाँ बड़ी बड़ी इन्हीं लौंड़ों के कारण हो गईं हैं। तेरी चबूतरा जैसी चूत भी इन्हीं लौंड़ों के कारण हो गयी है।

आज मैं बहुत खुश हूँ की तू जवानी का पूरा मज़ा लेने लगी है।रात में जब सामूहिक चुदाई का जमावड़ा लगा तो मैंने 

देखा की कुनबे की कुछ बेटियां बड़ी मस्ती कर रहीं हैं। मैंने देखा शमा नंगी नंगी सना के अब्बू के लण्ड पर बैठी है 

और सना नंगी नंगी शमा के अब्बू के लण्ड पर।हिना सबा के अब्बू का लण्ड पी रही है और सबा हिना केअब्बू का 

लण्ड पी रही है।नदीम और करीम दोनों एक दूसरे की बीवी चोद रहें हैं। मुझे तभी शब्बीर का लण्ड दिखाई पड़ा तो 

मैंने हुमा को नंगी नंगी उसके लण्ड पर बैठा दिया। बेटियां जब एक दूसरे के अब्बू के लण्ड पर, एक दूसरे के भाई 

जान के लण्ड पर, एक दूसरे के देवर के लण्ड पर और एक दूसरे के शौहर के लण्ड पर बैठतीं हैं तो मुझे बड़ा मज़ा 

आता है।मैं इस तरह की सामूहिक चुदाई खूब एन्जॉय करतीं हूँ और हुमा भी खूब एन्जॉय करती हूं ।

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