Indian Chudai Story In Hindi

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Indian Chudai Story In Hindi

रत्ना की जान गले में अटक गयी, जब उसने ये आवाज़ सुनी, झट से अपनी नज़रे उठाते हुए;उस आवाज़ की तरफ़ 

दौड़ायी| तो देखा की, चंपक दरवाज़े पर खड़ा, मुस्कुराते हुए, अपनी नज़रें रत्ना की मस्त झांटो सें घीरी रसीली बुर 

पर अटकी थी| रत्ना के तो होश ही उड़ गये, मानो : उसे बीज़ली के हज़ारो वाट का करंट लग गया हो, वो स्तब्ध उसी desi chudai kahani hindi me

कामुक मुद्रा में बैठी थी, तभी अचनाक! उसे याद आया की; वो अभी भी अपनी उंगलीयों को अपनी झांटेदार वाली 

काम रस से भरी बुर में घुसाये बैठी है| ये चेतना आते ही; उसने झट से; काम रस से भीगी उंगलीयों को अपनी 

पावरोटी जैसी बुर में से नीकालते हुए...अपनी अस्त-ब्यस्त साड़ीयों को ठीक करते हुए खड़ी हो जाती है| और 

घबराये हुए लड़खड़ाते स्वर में बोली-रत्ना - "च...चंपक त...तू!परेशानी के भाव को रत्ना के चेहरे पर झलकते देख, 

चंपक एक हरामीपना भरा मुस्कान हसंते हुए, अपने कदम रत्ना की तरफ बढ़ाते हुए बोला-चंपक - "वाह...! चाची| 

क्या गज़ब का नज़ारा था!और ये कहते हुए वो रत्ना के एकदम से करीब आ जाता है| चंपक को अपने इतने करीब 

पाकर, और अपनी गंदी हरकतो पर चंपक द्वारा पकड़े जाने पर उसे शरमींदगी महसुस होने लगी थी| परेशान और 

घबरा तो गयी ही थी वो, लेकीन फीर भी; उसने अपने आप को संभालते हुए कांपते लहज़ो में बोली-चं..चंपक 

बीटवा..व..वो मैं! मैं तेरे पाँव पड़ती हूँ, ये सब कीसी को मत बताना; नही तो मैं सबकी नज़रों में गीर जाउगीं बीटवा| 

मु...मुझे मा...फ़ कर दे!घबरायी हुई रत्ना को यूं गीड़गीड़ाता देख, चंपक की आँखो में चंपक आ गया, हवस का 

पागलपन उसकी आँखों में झलकने लगा था...| और सोचते हुए ("कसम से...कब से मौका देख रहा था, इस सांवली 

सी मस्त बदन वाली अपनी चाची के उपर सवारी करने का| आज़ ये सपना तो पूरा करके ही रहूँगा...| वाह...रे! मेरी 

बैल की गांड वाली कीस्मत")एक नंबर का हरामी था चंपक, उसे अपनी चाची की गीड़गीड़ाहट का कोई असर न 

हुआ, उसके लंड में तो आग लगी थी| और इधर रत्ना मारे डर के इस बात से कांप रही थी की, कहीं चंपक घर में 

सबको बता ना दे| अगर ऐसा हुआ तो, कैसे नज़रे मीलायेगी वो सबसे?क्या सोचेगी उसकी खुद की बेटी? और 

संगीता तो ना जाने क्या करेगी? कही संगीता दीदी ये ना सोच बैठे की, बुर के अंदर भड़कती गरम भट्टी को शांत 

करने के लिए, मैने जानबूझ कर चंपक को ये सब तो नही दीखाया? इन्ही सब परेशानीयों से घीरे सवालों को सोचती 

रही वो की, तभी अचानक! उसे अपने कंधों पर कुछ महसुस हुआ| गर्दन घुमाते हुए अपने कंधो पर देखी तो पायी 

की...चंपक ने अपना हाथ उसके कंधो पर रखा था|चंपक - तू ऐसा काहे सोचती है चाची की, मैं ये बात कीसी को 

बताउगां? आ..? घबरा मत, मैं ये बात कीसी को नही बताउगां| आख़ीर तू हमरी चाची है; और ई सब बात घर पर 

बताकर मैं नही चाहता की हमरी प्यारी चाची को शरमीदां होना पड़े|इस आवाज़ ने, मानो रत्ना के दील का बोझ 

हल्का कर दीया हो...वो झट से खुशी से चंपक को अपने सीने से चीपकाती हुई.रत्ना - हाय...रे मेरा लल्ला! कीतना 

अच्छा है तू...मुझे इतन चाहता है तू? मुझे तो पता ही न था|सीने से चीपकाने की वज़ह से, रत्ना की मुलायम चूचुक; 

चंपक के सीने में दबते ही उसे आनंद की अनुभूती कराने लगी| चंपक से अब रहा नही जा रहा था तो, उसने भी रत्ना 

को अपनी बाहों में जोर से जकड़ लीया| रत्ना की दूध चंपक के सीने में और चीपक जाती है...जीससे चंपक के मुह से desi bur chudai kahani

आंनद के मीठे बोल फुट पड़ते है|चंपक - आ...ह चा...ची! कब से मौका ढ़ूढं रहा था, तेरी इस मस्त जवानी को लूट 

कर मज़े लेने का"रत्ना तो मानो सकपका गयी! उसे तो यक़ीन ही ना हो रहा था| उसने झट से चंपक को अपने से 

ढकेलते हुए, उसकी बाँहों से आज़ाद होती हुई थोड़ा गुस्से में..रत्ना - पगला गया है का? का आनाप-सनाप बक रहा 

है?रत्ना की यूं गुस्से से भरी आवाज़ सुनकर, चंपक की गांड फट जाती है| और वो सोचने लगता है की('कहीं ये 

ससुरी, उल्टा हमे ही ना फसा दे!बैल...की...गांड, बुर के चक्कर में मेरा बाप...तो मेरा बुरता बना देगा) यही सब सोच indian chachi sex stories

कर चंपक थोड़ा डर जाता है, और हीम्मत करते हुए..चंपक - सच कहा रहा हूँ...चाची| तेरी ये ज़वानी मुझे पागल कर 

देती है| जब भी तेरे सीने के पपीतों को देखता हूं उसे खाने के लिए पगला जाता हूँ| और तेरी ये उठी-उठी मस्त गांड 

मेरे अंदर के सांड को जगा देती है, और मन करता है की तेरी गांड मार-मार कर ईसे फ़ाड़ दूं|"अवाक्...रत्ना की 

आँखे हैरत से इतनी फैल गयी की, मानो उसकी आँखों की गोटीया अब बाहर नीकल जाये, चंपक की ये गंदी बाते 

उसकी आग लगी जवानी में घी डालने का काम करते हुए, उस आग को और भड़का दी| 'गांड मार-मार कर फाड़ 

दूं' वाली चंपक की बात पर तो; रत्ना की गांड में सुरसुरी और बुर में फुदफुदी मच गयी| चुदाई की प्यासी रत्ना भी तो 

यही चाहती थी, और आज तो उसे एक जवान और गठीले ताकतवर शरीर का लड़का जो उसका भतीजा है उसे 

दमभर चोतना चाहता है| इस अहेसास से ही रत्ना मदमस्त हो गयी थी...वो तो चाहती थी की, अभी साड़ी खोलकर 

खुद को चंपक को सौंप दे और बोले की ले बेटा...लूट ले अपनी चाची की जवानी, तार-तार करदे अपनी चाची की 

इज्जत| रत्ना चंपक की उन गंदी बातो से इतना गरम हो गयी की, वो ना जाने क्या-क्या सोचने लगी| लेकीन 

फीर.चंपक - चाची...ऐसे चुपचाप खड़ी मत रह! मुझे डर लग रहा है!...कुछ तो बोल? मुझे पता है की तू भी चुदवाने 

के लिए तड़प रही है, क्यूकीं रमेश चाचा तेरी अच्छे से चुदाई नही कर पाते|"रत्ना को एक के बाद एक झटके लग रहे indian desi chudai ki kahani

थे, लेकीन उसे चंपक भा गया था| उसकी बातें उसे कामोत्तेजीत कर रही थी.| रत्ना ने अपनी आँखे तरेरते हुए चंपक 

की तरफ देखी...और..फीर आश्चर्य भरे अदांज में बोली.रत्ना - हाय...राम! कीतनी गंदी बाते करता है रे तू, मैं तो तूझे 

लल्ला समझती थी...लेकीन तू तो नीठल्ला नीकला रे| मेरे दुध को पपीता समझ कर खाना चाहता है, और मेरी गांड 

देखकर तेरा अंदर का साड जागने लगता है। और उसी सांड से अपनी चाची की गांड भी मारना चाहता है...आं? 

और वो भी बेरहमी से, इतना की जब तक मेरी गांड ना फट जाये|...हाय राम..! ये लड़का तो अपनी चाची को ही 

चोदने की बात कर रहा है| कीतना गंदा है रे तू लल्ला?चंपक - आब का करुं...चाची? तूझे देखते ही बस में नही 

रहता हूँ मै|"रत्ना - हाय..रे दईया! तू बस में नही रहता या तेरे अंदर का वो सांड?"चंपक - दोनो...चाची"रत्ना - तो...तू 

मुझे सच में चोदे देगा लल्ला|चंपक - तू बस हां बोल...चाची, ऐसी चुदाई करुगां तेरी की...ज़ीदगी भर मेरा लंड अपनी hindi sex story khet me

बुर में लेकर घुमेगी|दोनो के बीच हो रही गंदी और कामुक बातो से अब तक दोनो ही अपने वश में नही थे। रत्ना तो 

इतनी गरम हो चुकी थी की, उसे पसीने भी आने लगे थे। उसका ब्लाउज पसीने से भीग कर उसके चूचुक से चीपक 

गया था। और वो कामुक नज़ारा प्रदर्शीत कर रहा था की, पूछो मत! पता नही ऐसा नज़ारा देखकर चंपक अब तक 

क्यूँ नही कुछ कीया? शायद वो अपनी चाची के मुह से 'हां' सुनने का इंतज़ार कर रहा था| और इधर रत्ना भी अपने 

आप को रोक नही पा रही थी...वो सोच रही थी की, कैसे हां बोले? लेकीन अगर चंपक थोड़ी जबरदस्ती करें तो वो 

मना नही करेगी| ऐसे अचानक से हां कैसे बोल.क्या सोचने लगी चाची?" - चंपक की आवाज़ रत्ना के कानो में 

पड़ी|"रत्ना - म...मै अब क्या बोलूं? लल्ला| मैं तो तेरी चाची हूँ, और ये सब काम तू मेरे साथ नही कर सकता...लल्ला, 

गलत है|रत्ना अपना मन दबाकर बोली...वो तो कुछ और ही चाहती थी|चंपक- ऐसे मत तड़पा चाची...कुछ गलत नही desi ladki ki chudai ki kahani

है| क्या ये सच नही है की तू भी इसके लिए प्यासी है?रत्ना, चंपक की बातो से पूरी तरह सहमत थी| और वो भी अपना 

सब-कुछ चंपक के उपर लूटा देना चाहती थी...मगर ना जाने कीस दुवीधा वश वो पहला कदम खुद ना उठा कर 

इस आस में बैठी थी की, चंपक ही पहले पहल करे-रत्ना - समझा कर लल्ला...मन तो, मन तो मेरा भी है| की तेरे 

साथ..., लेकिन...लेकीन मैं ये तेरे साथ नही कर सकती|"चंपक को ये समझ आ गया था की, अब अगर उसने जबरन desi chudai ki stories

कुछ कीया तो, रत्ना जरुर शोर मचायेगी क्यूकीं '(चाची तो तैयार ही नही है...इ सब करने को| मुझे पता है की ये 

चुदवाने के लिए प्यासी तो है, लेकिन हो सकता है कि...चाची इस रिश्ते की वजह से ये सब करना पाप समझती हो, 

अब क्या करुं...बैल की गांड लगी! जबरन करुं, नही...यार! जोख़िम नही उठा सकता| छोड़ देते है...बुर तो हज़ारों 

मील जायेगी, मगर बात फैली तो...गांड लग जायेगी|)चंपक ने कुछ ही समय में बहुत कुछ सोच लीया था| लेकीन वो 

एक बार अपनी चाची को अपना मोटा सांड ज़रुर दीखाना चाहता था...ईसीलिए उसने पैंट को पकड़ते हुए नीचे 

सरका देता है| उसका मोटा-लंबा लंड बाहर नीकल कर रत्ना की आँखों के सामने लहरा रहा था| आवाक्...रह गयी 

रत्ना तो, उसका मुह खुला का खुला रह गया| आँखे अपलक फाड़ें उसके सांड को देखती ही रह गयी| गला सुखने 

लगा था रत्ना का, लेकिन तभी रत्ना की हालत को आराम देते हुए; चंपक ने अपने पैंट को उपर उठाते हुए बंद कर 

लीया; और उसका लंड चंपा की आँखों से ओझल हो गया| पैंट बंद करते हुए चंपक बस इतना ही बोल पाया.चपक  

ठीक है चाची! मुझसे गलती हो गयी, माफ़ कर दे! मुझे नही पता था की, तू रीश्तो के बोझ के तले दबी है| ये बात 

कीसी को बताना मत...नही तो मैं सबकी नज़रों में गीर जाउगा|और ये कहते हुए चंपक रसोईं घर से बाहर नीकल 

जाता है, और बेचारी रत्ना कुछ समझ ही नही पाती.


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