Kuwari Padosan Ko Sex Story

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कुंवारी पड़ोसन को दिया चुदाई ज्ञान

दोस्तो, पिछले दिनों आपने मेरी कहानियाँ पढ़ी और ढेर सारे तारीफ भरे मेल किए, जिसके लिए मैं आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।कुछ लोग मेल में लिखते हैं कि किसी लड़की का जुगाड़ करवा दीजिए, अत: आपसे निवेदन करता हूँ कि जब किसी लेखक को आप मेल करें तो ऐसी बेतुकी बातें न करें और न ही अभद्र भाषा का प्रयोग करें।आइए चलते हैं कहानी की ओर और खो जाते हैं एक मीठे एहसास में जहाँ सिर्फ मस्ती ही मस्ती बिखरी हुई है…padosan ki chudai hindi story


मित्रों आपने पिछली कहानी भाभी की जीरो पार्टी में पढ़ा कि जब मैं भाभी के साथ मस्ती कर रहा था तो बगल की चारपाई पर लेटी भाभी की पड़ोसन गीता पूरा खेल देख रही थी और बार-2 करवट बदल रही थी।मेरा मन तो था कि गीता के साथ भी मजे करूँ मगर भाभी ने मना कर रखा था इसलिए मैंने गीता को नहीं छेड़ा था, किन्तु बाद में भी मैं गीता के बारे में सोचता रहता था। गीता को 1-2 बार मैंने भाभी के साथ देखा था।कई दिन बाद एक दिन भाभी के मोबाइल से गीता का फोन आया।मैं समझा भाभी होंगी तो मैं बोल पड़ा- हैलो जानेमन, कैसी हो?‘मुझे जानेमन कब से बना लिया?’ गीता बोली।बदली आवाज से मुझे कुछ शक हुआ, मैं चुप रहा।padosan audio story kahani


‘हैलो, मैं गीता हूँ, पहचाना नहीं क्या?’ वो बोली।‘हाँ गीता, मैं तुम्हें पहचान नहीं पाया था, मैं समझा भाभी हैं, और बताइए !’ मैंने कहा।‘भाभी के साथ बहुत मस्ती करते हो ! क्यों?’ वो बोली।‘क्या करूँ, बिना किसी जवान साथी के बिना टाइम ही नहीं कटता।’ मैंने कहा।‘दोस्ती करने के लिए तुम्हें एक शादीशुदा ही मिली?’ उसने पूछा।‘प्रेम से जो भी नमक रोटी मिल जाए, उसी में गुजारा कर लेता हूँ, कुँवारी लड़कियाँ नखरे ज्यादा दिखाती हैं।’ मैंने कहा।padosan ki chudai hindi kahani


‘अच्छा बताओ कि उस दिन भाभी के साथ क्या कर रहे थे?’ उसने पूछा।‘कुछ तो नहीं !’ मैंने कहा।‘मुझे मत बनाओ मैं सब देख रही थी।’ गीता बोली।‘अच्छा? क्या देखा था तुमने?’ मैं शरारत के मूड में आ गया।‘भाभी का दूध पी रहे थे न?’ वो शरमाते हुए बोली।‘हाँ यार, तुमने तो सच में देख लिया, और क्या-2 देखा?’ मैंने कहा।‘क्या बताऊँ, बड़ा गंदा काम करते हो !’ गीता ने कहा।


‘तुमने कभी नहीं किया क्या?’ मैंने पूछा।‘नही, मैं ऐसी नहीं हूँ !’ वो बोली।‘कभी तो करना ही पड़ेगा।’ मैंने कहा।‘नहीं, मैं ऐसा काम कभी नहीं करुँगी।’ उसने कहा।‘क्या अपने पति के साथ भी नहीं करोगी? मैंने तो सुना है तुम्हारी शादी भी तय है?’ मैंने कहा।‘ऐसा करना क्या जरूरी है? क्या मिलता है यह सब करके?’ वो बोली।यह करना ज।रूरी है, इससे क्या मिलता है, यह फोन पर नहीं बता सकता कभी मिलो तो बताऊँ’ मैंने कहा।‘कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करोगे?’ वो बोली।‘कुछ नहीं करुँगा सिर्फ वो बताऊँगा जिससे तुम भी मजे ले सकती हो और अपने पति को भी खुश रख सकती हो।’ मैंने कहा।dehati sex story in hindi


‘ठीक है, मैं किसी दिन भाभी के घर पर आऊँगी, तब बता देना लेकिन कुछ करना मत ! ठीक है?’ उसने कहा।‘ठीक है बाबा, कुछ नहीं करुँगा अब भाभी से बात कराओ !’‘भाभी अभी कहीं गई हैं, जब आएँगी तो करवा दूँगी बाय !’ और गीता ने फोन रख दिया।करीब बीस मिनट बाद भाभी की मिसकाल आई, मैंने कालबैक किया। भाभी से मैंने गीता से हुई बात के बारे में बताया और उससे मिलवाने को बोला तो भाभी साफ मना करने लगी, बोली- नहीं, तुम्हें नए माल का चस्का लग जाएगा तो मुझे तो भूल ही जाओगे, न बाबा न, मैं ऐसा नहीं करुँगी।’मैंने भाभी को समझाया- यार, तुम तो हमेशा मेरी रहोगी, एक ही मुलाकात की तो बात है यार, करवा दो ! वैसे भी तुम्हारा… सातवाँ महीना चल रहा है ज्यादा झटकों से तुम्हें भी तकलीफ होगी इसलिए तब तक गीता को निपटा दिया जाए।savita audio story kahani


काफी मक्खन लगाने के बाद भाभी मानी।मैंने भाभी को सारा प्रोग्राम समझा दिया।कुछ दिनों के बाद गीता की रिश्तेदारी में तेरहवीं थी जिसमें गीता के घरवालों को चले जाना था उसी रात का प्रोग्राम तय किया गया।दो दिन बाद वो रात भी आ गई जिसका मुझे इंतजार था। फोन पर सारा कार्यक्रम तय था जिसके अनुसार मैं रात का खाना खाकर करीब 10 बजे घर से निकल पड़ा।फरवरी में वैसे तो ठंड काफी कम हो जाती है पर इधर दो दिन पहले ओले पड़े थे जिससे ठंड काफी बढ़ गई थी।मैं सुनसान रास्ते पर चला जा रहा था, ठंडी हवा के झोंके शरीर में सिहरन पैदा कर रहे थे। मुझे आभास हो रहा था कि चूत का नशा इंसान में किसी भी परेशानी से लड़ने की ताकत पैदा कर देता है।dehati sex story in hindi


भाभी के घर के पास पहुँच कर मैंने भाभी को मैसेज किया, दो मिनट बाद जवाब आया- पीछे का दरवाजा खुला है, आ जाओ।मैं दबे पाँव अंदर गया, भाभी ने बढ़कर मेरा आलिंगन किया, मैंने भी भाभी को किस किया, यह देख गीता शरमा गई जो बरामदे में बैठी हीटर से हाथ सेंक रही थी।मैं गीता के पास गया और वहीं बिछी चटाई पर बैठ गया और गीता से बोला- हैलो गीता, कैसी हो?‘मैं तो ठीक हूँ, अपनी सुनाइए !’ गीता मुस्कुराते हुए बोली।‘मैं भी ठीक हो जाऊँगा तुमसे मिलकर !’ मैंने कहा।तब तक भाभी बोली- तुम लोग एक दूसरे को ठीक करो, मैं तब तक चाय बनाती हूँ। ओके?’ और मेरे गाल में चिकोटी लेकर चली गई।


मैंने गीता से कुछ देर इधर-उधर की बात करने के बाद अपने काम की बात पर आ गया, मैं बोला- अच्छा गीता, यह बताओ कि तुमने कभी किसी लड़के से दोस्ती की है?‘नहीं मेरे घर वाले बहुत सख्त हैं, मुझे कहीं अकेले नहीं जाने देते, वो तो भाभी के घर में कोई लड़का नहीं है, इसलिए यहाँ सोने दिया वरना यहाँ भी मुझे अकेले नहीं छोड़ते।’‘तो तुमने मुझसे मिलने का प्रोग्राम कैसे बना लिया?’ मैंने पूछा।‘भाभी कह रही थी कि जो लड़की सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती, वो अपने पति को खुश नहीं कर सकती जिससे दाम्पत्य जीवन नर्क बन जाता है और तुम तो जानते हो कि मेरी शादी तय है इसलिए मैंने सोचा कि तुम लोगों से कुछ जानकारी लेने में क्या हर्ज है इसलिए…’ वो बोली।‘गुड, काफी समझदार हो यार तुम तो !’ मैं मन ही मन अपनी योजना को सफल होता हुआ देख खुश हुआ।तब तक भाभी चाय लेकर आ गई। हम तीनों ने चाय पीना पीना शुरु किया।indian podosan hindi sex story


मैं गीता से बोला- देखो गीता, थ्योरी और प्रैक्टिकल में फर्क होता है, जो काम करने से जितना सीखा जा सकता है उतना सिर्फ बताने से नहीं इसलिए कुछ तो करना ही पड़ेगा !‘हाँ, लेकिन गलत काम मत करना !’ वो बोली।‘नहीं यार, कुछ गलत नहीं होगा, मैं जो करुँ तुम उसे महसूस करना और जो भाभी बताएँ वो करती रहना ! इससे तुम्हें पूरी बात मालूम हो जाएगी !’गीता बोली कुछ नहीं, सिर्फ मुस्कुराती रही। मेरी बातें सुनकर भाभी भी मुस्कुरा रही थी।चाय खत्म हो चुकी थी अत: भाभी ने कहा- चलिए बिस्तर पर चलते हैं, बाकी बातें वहीं करेंगे !मैं उठ गया और गीता का हाथ पकड़कर उठाया, वो भी शर्माते हुए उठी और धीरे-धीरे मेरे साथ चलने लगी।सच बताऊँ दोस्तो, उसका गोरा चेहरा, पतले गुलाबी होंठ और उसका शर्माना देखकर मेरा लंड बेताब हो रहा था लेकिन मैं किसी तरह खुद पर काबू किए हुए था।


भाभी ने योजना के अनुसार एक ही बिस्तर लगाया था, यह देखकर गीता बोली- क्या एक ही बिस्तर पर तीनों लेटेंगे?भाभी ने कहा- हाँ यार, इससे ठंड भी नहीं लगेगी और चक्रेश तुम्हारे साथ कुछ गलत करे तो मैं तुम्हारी मदद भी करुँगी, है न?मैं और गीता दोनों मुस्कुराने लगे।भाभी ने गीता को बीच में लिटाया मैं और भाभी अगल-बगल लेट गए। मैं थोड़ा उठकर गीता के ऊपर से होता हुआ भाभी को चूमने लगा, फिर गीता के कान में कहा- गीता भाभी की छाती दबाओ !गीता धीरे-धीरे दबाने लगी, गीता के एक गाल पर मैं और दूसरे पर भाभी चुम्बन करने लगी। भाभी ने गीता की एक छाती और मैं दूसरी छाती सहलाने लगा।‘हाऽऽऽय… क्या गोल और मस्त छातियाँ थी !’ इधर मेरा लंड सख्त होकर उसकी जाँघ फाड़ने को बेताब था जिसे शायद वो भी महसूस कर रही थी।free gujarati sex stories


अब मैं उसके होंठ चूसने लगा। भाभी ने उसका फ्राक उतार दिया और अपनी साड़ी भी खोल दी। गीता का एक निप्पल मैं और दूसरा भाभी चूस रही थी जिससे गीता के शरीर में करेंट लगना शुरु हो गया था, वो ऊँऽऽऽह…आऽऽऽह… की आवाजें निकाल रही थी।अचानक भाभी पलट गई और गीता की सलवार को उतार कर उसकी चूत को चाटने लगी। मैं लगातार गीता की छाती चूस और मसल रहा था।5-6 मिनट बाद मैंने अपना लोअर उतार दिया अंदर कच्छा नहीं था। भाभी का हाथ पकड़कर मैंने खड़े लंड पर रखा। भाभी मेरा इशारा समझ गई, उन्होंने गीता का हाथ पकड़कर मेरे लंड पर रखा और उसे सहलाना सिखाया। गीता का नर्म नाजुक हाथ का स्पर्श पाकर लंड से कुछ बूँदें निकल गईं।अब मैं घूम गया गीता की चूत की तरफ। नर्म नाजुक व गदराई हुई चूत पर हल्के रोयें थे, मैं चूत को चाटने लगा, उधर भाभी ने मेरा लंड चूसा और फिर गीता को कुछ समझाया। कुछ समझाने व कुछ उत्तेजना के कारण गीता ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।bhartiya chudai ki kahani


इधर मैं चूत की चुसाई में जुटा था। गीता के मुँह में मेरा लंड था फिर भी नाक से ऊँऽ ऊँ की आवाजें मुझे और अधिक उत्तेजित कर रही थी। मुझे लगा कि अगर ऐसे ही चला तो मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा। यह कहानी आप अंतर्वासना डाट काम पर पढ़ रहे हैं।मैंने झट से लंड को बाहर खींचा चूत की चुसाई चालू थी, अचानक गीता ऐंठने लगी।उसने मेरा सर जोर से अपनी चूत पर दबाते हुए पानी छोड़ दिया।मैं उसकी गीली चूत को वैसे ही छोड़कर घूम गया और गीता को किस किया।भाभी को मैंने इशारा किया और लंड को गीता की गीली चूत पर रगड़ने लगा। गीता फिर से गर्म होने लगी। भाभी ने गीता के होठों को अपने मुँह में कैद किया और दोनों छातियाँ मसलने लगी।hindi story sex


जोश में आकर जैसे ही गीता ने अपनी चूत ऊपर उठाई पहले से ही तैयार लंड मैंने झटके के साथ उसकी चूत में उतार दिया।गीता छटपटाने लगी, शायद चिल्लाने भी लगती अगर भाभी ने उसका मुँह दबा न रखा होता। मुझे लगा जैसे मेरा लंड गन्ने की मशीन में आ गया हो, इतनी टाइट चूत थी।मैं और भाभी बराबर उसे सहला रहे थे कुछ देर बाद उसे आराम मिला। अब मैंने धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना चालू किया। गीता अब पूरा सहयोग कर रही थी।दो मिनट बाद मैंने गीता को घोड़ी बनने को कहा और भाभी ने अपनी चूत गीता के मुँह पर रख दिया। पीछे से मैं गीता की चूत चोद रहा था और आगे गीता भाभी की चूत चाट रही थी, भाभी भी पूरी लगन से गीता की छातियाँ मसल रही थी।sexy kahani in hindi


गीता का मुँह तो व्यस्त था मगर मेरे और भाभी के मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी।करीब 5-7 मिनट की धक्कमपेल चुदाई के बाद हम तीनों लगभग एक साथ ही झड़ गए। मैं जैसे ही बाहर हुआ वो दोनों हसीनाएँ मुझे ताबड़तोड़ चूमने लगी।हमने अपने-अपने कपड़े पहने और भाभी ने चाय बनाई।तीनों ने चाय पी और फिर मैं उठकर अपने घर चला आया।दूसरे दिन गीता ने फोन पर बताया कि उसे काफी खून निकला था, बड़ा दर्द हो रहा था और चलने में भी तकलीफ हो रही थी। मैंने उसे समझाया और कहा कि सेक्स का ज्ञान तुम्हें हो गया है।khet me chudai kahani,antarvasna podosan,podosan ki chudai story hindi,porn hindi novel,sexi hot hindi story.

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